उत्तराखंड

संघर्ष से आत्मविश्वास तक का सफर, लेखक गांव में नाटक ‘माई लाइफ, माई वे’ ने दर्शकों को झकझोरा

देहरादून। रिश्तों के टूटने की पीड़ा, अकेलेपन की कसक और फिर अपने जीवन को नए सिरे से गढ़ने का साहस इन भावनाओं से बुना गया नाटक “माई लाइफ, माई वे” विरासत कला उत्सव के तीसरे दिन दर्शकों को अंदर से झकझोर दिया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं लेखक गाँव, थानों, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय “विरासत कला उत्सव” के तीसरे दिन गुरमीत पनाग द्वारा लिखित नाटक “माई लाइफ, माई वे” का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन संगीता गुप्ता ने किया। रविवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोफेसर (डॉ.) राकेश सुंदरियाल, कुलपति, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, उत्तराखंड ने दीप प्रज्वलित कर किया। नाटक की परिकल्पना केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने की है।
नाटक की कहानी कनाडा में रहने वाली पवलीन नामक महिला के जीवन के उतार-चढ़ाव के इर्द-गिर्द घूमती है। पवलीन की शादी अरविंद नाम के एक व्यवसायी से होती है। लव मैरिज के बाद दोनों का जीवन खुशहाल चलता है और उनके दो बच्चे सावन और रोशनी भी हैं। सब कुछ सामान्य चल रहा होता है, लेकिन तब स्थिति बदल जाती है जब पवलीन को पता चलता है कि अरविंद का ईशा नाम की युवती के साथ संबंध है। इस सच्चाई से पवलीन को गहरा आघात लगता है। जब वह अरविंद से सवाल करती है तो वह सब स्वीकार कर घर छोड़ देता है।

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